नीरज कुमार सिंह संवाददाता परसपुर गोंडा / Wed, Jun 24, 2026 / Post views : 57


परसपुर, गोण्डा। परसपुर नगर समेत ग्रामीण इलाकों में बुधवार की शाम आठवीं मुहर्रम के अवसर पर जगह-जगह से जुलूस निकाले गए। परसपुर नगर के कटहरी बाग, शान नगर, प्रेम नगर, साई तकिया, नई बस्ती, अंजही, गाड़ी बाजार, आटा, बनवरिया सहित विभिन्न इमाम चौकों से निकले जुलूस अपने परंपरागत मार्गों से होकर निर्धारित स्थानों की ओर बढ़े। जुलूसों में शामिल नौजवानों ने ढोल-ताशों की थाप पर "या हुसैन" के नारे लगाए और मातमी माहौल में अकीदतमंदों ने शहादत-ए-कर्बला को याद किया।


जुलूसों में आकर्षक रोशनी से सुसज्जित झांकियां, वाहनों पर मक्का-मदीना, पीर-पैगम्बर के आस्तानों की प्रतिकृतियां, इलेक्ट्रॉनिक वाटर फव्वारे, शान-ए-हिंदुस्तान की तस्वीरें, तिरंगा ध्वज और अलम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे। देर रात आटा-परसपुर सीमा क्षेत्र में पहुंचकर जुलूसों का समापन हुआ। शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिगत परसपुर थानाध्यक्ष कमल शंकर चतुर्वेदी पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील रहे। महिला और पुरुष आरक्षियों सहित उपनिरीक्षक अपने हमराहियों के साथ गश्त करते रहे।


परसपुर नगर के बालपुर तथा करनैलगंज-आटा मार्ग पर जुलूसों और मेले जैसी रौनक देखने को मिली। वहीं मुहर्रम पर्व को लेकर परसपुर नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ताजिया और संबंधित सामानों की दुकानों पर दिनभर भारी भीड़ रही। कस्बे के विभिन्न चबूतरों की कमेटियों द्वारा आठवीं मुहर्रम पर मातमी जुलूस निकाले गए। स्थानीय लोगों के अनुसार मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही पहले दिन से ही ढोल-ताशों और गाजे-बाजे के साथ जुलूसों का सिलसिला शुरू हो गया था और लोग हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए "या हुसैन" की सदाएं बुलंद कर रहे हैं। इस वर्ष मुहर्रम का मुख्य पर्व 26 जून को मनाया जाएगा।


सभासद रहमत अली ने बताया कि आशूरा के दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शिया समुदाय के लोग काले वस्त्र धारण कर जुलूस निकालते हैं और उनके संदेश को लोगों तक पहुंचाते हैं। मान्यता है कि हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। इसी कारण आशूरा का दिन गम और मातम के रूप में मनाया जाता है। कर्बला की जंग में यजीद की सेना द्वारा पानी तक बंद कर दिए जाने के बावजूद हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने जुल्म के सामने घुटने नहीं टेके और सत्य तथा इंसानियत की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
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