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इंडियन खाता धारकों ने कर्ज किसानों ने बैंक को गलत बताया : इंडियन बैंक ऋण विवाद और कोऑपरेटिव सोसायटी में करोड़ों की अनियमितताओं के आरोप, पीड़ितों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

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आर के पाण्डेय एडिटर इन चीफ बैज़लपुर उत्तर प्रदेश / Wed, Jun 24, 2026 / Post views : 128

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इंडियन बैंक ऋण विवाद और कोऑपरेटिव सोसायटी में करोड़ों की अनियमितताओं के आरोप, पीड़ितों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

गोण्डा। जनपद गोंडा में इंडियन बैंक (पूर्व इलाहाबाद बैंक) से जुड़े कथित ऋण फर्जीवाड़े तथा एक कोऑपरेटिव सोसायटी में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। पीड़ित खाताधारकों, कर्मचारियों और सोसायटी से जुड़े लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन, बैंक के उच्च अधिकारियों एवं संबंधित विभागों से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। एफआईआर के आधार पर लगाए गए गंभीर आरोप शिकायतकर्ताओं ने एफआईआर संख्या 0538/26 का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि कई ऋण खातों में अनियमितताएं की गईं, जिससे खाताधारकों को आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि पूरे मामले में बैंकिंग प्रक्रियाओं और रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

ऋण चुकाने के बाद भी बकाया दिखाने का आरोप

पीड़ित शिव प्रसाद मिश्रा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2014 में इंडियन बैंक की रानी बाजार शाखा से 2.25 लाख रुपये का ऋण लिया था। उनके अनुसार ऋण की पूरी राशि जमा करने के बाद बैंक द्वारा उन्हें "नो ड्यूज सर्टिफिकेट" भी जारी किया गया, लेकिन इसके बावजूद उनके खाते को लेकर विवाद उत्पन्न किया गया। अन्य खाताधारकों ने भी आरोप लगाया कि उन्होंने समय पर ऋण की किस्तें जमा कीं और लाखों रुपये का भुगतान किया, फिर भी बैंक रिकॉर्ड में बकाया राशि दिखाई जाती रही। ब्याज और वसूली प्रक्रिया पर सवाल शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ऋण खातों में ब्याज की गणना और वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। कई मामलों में नियमित भुगतान के बावजूद बकाया राशि बढ़ती दिखाई गई, जिससे खाताधारकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े का आरोप

पीड़ितों ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत किए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। कोऑपरेटिव सोसायटी की संपत्ति बिक्री पर उठे सवाल मामले में कोऑपरेटिव सोसायटी की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में आ गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूर्व में इलाहाबाद बैंक से संबद्ध कोऑपरेटिव सोसायटी के नाम खरीदी गई एक मूल्यवान भूमि को कथित रूप से उच्च अधिकारियों की अनुमति के बिना लगभग 60 लाख रुपये में बेच दिया गया। पीड़ितों का दावा है कि इस संपत्ति की बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई तथा सोसायटी के सदस्यों को इसकी समुचित जानकारी भी नहीं दी गई। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराए जाने की मांग की है।

ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय लेन-देन पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं के अनुसार सोसायटी के करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन का पूरा विवरण सदस्यों को उपलब्ध नहीं कराया गया। वर्ष 2021 एवं 2022 की ऑडिट रिपोर्ट भी सदस्यों को नहीं दिखाई गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।आरोप है कि कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और पदाधिकारियों की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। आरबीआई दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप पीड़ितों का कहना है कि ऋण खातों के संचालन, ब्याज निर्धारण और वसूली प्रक्रिया में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया गया। साथ ही खाताधारकों को उनके खातों की वास्तविक स्थिति से समय पर अवगत नहीं कराया गया।

निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ितों ने जिलाधिकारी, बैंक के उच्च अधिकारियों, सहकारिता विभाग एवं अन्य संबंधित एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि गहन जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और घोटाले की सच्चाई सामने आ सकती है।

शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्याय के लिए उच्च स्तर तक अपनी आवाज उठाने को मजबूर होंगे

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