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: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद आजम खां की जमानत अर्जी पर सुनवाई 11 मई तक के लिए स्थगित की

आर के पाण्डेय एडिटर इन चीफ बैज़लपुर उत्तर प्रदेश / Fri, May 6, 2022 / Post views : 187

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद आजम खां की जमानत अर्जी पर सुनवाई 11 मई तक के लिए स्थगित कर दी। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बी आर गवई ने नोट किया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खां की जमानत अर्जी पर अपना आदेश पहले ही सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने खां की जमानत याचिका में आदेश पारित करने के लिए हाईकोर्ट को समय देने के लिए रजिस्ट्री को बुधवार को मामले को सूचीबद्ध करने को कहा जिसे 05.05.2022 को सुरक्षित रखा गया था।

आजम खां की ओर से पेश वकील ने बेंच को अवगत कराया कि 05.05.2022 को शाम 6:30 बजे तक मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। उन्होंने प्रस्तुत किया - "मामले पर कल सुनवाई हुई और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। शाम 6:30 बजे तक मामले की सुनवाई हुई।" जस्टिस राव ने कहा कि बेंच वर्तमान आवेदन पर यह देखने के लिए है कि हाईकोर्ट खां की जमानत याचिका पर आदेश पारित करे, जो उसके समक्ष काफी समय से लंबित है।

चूंकि दलीलें सुनी गई हैं, हम सोमवार को सुनेंगे। हम इस पर रोक लगा रहे हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि हाईकोर्ट एक आदेश पारित करे। इस स्तर पर हम एक आदेश पारित नहीं कर सकते। उन्हें एक आदेश पारित करने दें। अगर हम इस पर रुक जाते हैं। कम से कम वे एक आदेश पारित करें।" उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ को सूचित किया - "फैसला सुरक्षित कर लिया गया है।" हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका के निपटारे में अत्यधिक देरी से परेशान जस्टिस राव ने टिप्पणी की

अब फैसला सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है कि हम आपको बताएं। 137 दिन तक कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। उन्हें 86 मामलों में जमानत पर रिहा किया गया है। यह एक ही मामला है। यह न्याय का मजाक है। हम अभी इतना ही कह सकते हैं। यदि आवश्यक हुआ तो हम और कहेंगे। इसे बुधवार को आने दें। आइए हम उन्हें 2 दिन का मौका दें।" कई मामलों में आरोपों का सामना कर रहे आजम खां 26.02.2020 से सीतापुर जेल में बंद हैं। उन्हें ज्यादातर मामलों में जमानत मिल चुकी है। लेकिन, ऐसे तीन मामले हैं जिनमें भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, जालसाजी, सार्वजनिक विश्वास का आपराधिक उल्लंघन, आपराधिक साजिश, आपराधिक मानहानि, सबूतों से छेड़छाड़ और वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने के आरोप शामिल हैं जिनमें जमानत मांगी गई है, जैसा कि खां ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने कार्यवाही को रोकने के लिए 'सभी उपलब्ध साधनों को अपनाया' है। एक विशेष सांसद/विधायक कोर्ट ने यह देखते हुए 27.01.2022 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी कि उनके द्वारा प्रकाशित कुछ तथ्यों में शांति और सद्भाव को बाधित करने के लिए जनता या समुदाय के सदस्यों को उकसाने की क्षमता है।

चूंकि उनकी जमानत याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष लंबित थी, इसलिए उन्होंने रामपुर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव अभियान में भाग लेने के लिए अंतरिम एक-पक्षीय जमानत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। खां की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने पीठ को अवगत कराया कि हाईकोर्ट जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए अनिच्छुक है। हालांकि बेंच ने उन्हें जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया, लेकिन आदेश दिनांक 08.02.2022 के तहत, इसने खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा। बेंच ने हाईकोर्ट से याचिकाकर्ता की चिंताओं पर विचार करने और मामले को जल्द से जल्द निपटाने के लिए भी कहा। यह नोट किया - "याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने और आवेदन के शीघ्र निपटान की मांग करने की स्वतंत्रता है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि न्यायालय याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखेगा और मामले का शीघ्र निपटारा करेगा।" 29.04.2022 को, सिब्बल ने और देरी होने का संदेह करते हुए पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। उन्हें आशंका थी कि यदि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया तो भी आदेश पारित करने में देरी हो सकती है।

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