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धीरेश त्रिवेदी लखनऊ संवाददाता / Sat, Oct 17, 2026 / Post views : 9
सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित हत्याकांड मे पति की हत्या करके सांप से डसवाने वाली रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को वारदात के 547 दिन बाद मेरठ जिला कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
शुक्रवार को सजा सुनाने से पहले कोर्ट ने रविता और अमरदीप का पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुना। जज ने दोनों से पूछा- तुम दोनों को हत्या का दोषी ठहराया गया है। क्या सजा चाहते हो?
रविता ने कहा-" मेरे 3 छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनका ख्याल रखा जाए। फिर वह शांत हो गई।
इसके बाद अमरदीप ने कहा" मेरे मां-बाप बूढ़े हैं। उनकी सेवा करने वाला कोई नहीं है। उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे इसके बाद दोनों फूट-फूट कर रोने लगे। ADJ-12 जयवीर सिंह नागर ने नीला ड्रम हत्याकांड का नाम लिए बगैर कहा- 'केवल काट डालना ही जघन्य अपराध नहीं है।'
जज ने फैसले में सती सावित्री का जिक्र किया। कहा- 'पति की लंबी उम्र के लिए पत्नी करवाचौथ का व्रत करती है, लेकिन यहां प्रेमी के साथ ये कृत्य किया जो माफी लायक नहीं है।' जज ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना और पेन तोड़कर फेंक दिया।
रविता- अमरदीप को मृत्युदंड सुनाने वाले जज एडीजे 12 जयवीर सिंह नागर हैं। मूल रूप से नोएडा के निवासी हैं।
2006 में मेरठ के ही चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के एमएच कॉलेज गाजियाबाद से एलएलबी किया है। इसके बाद इलाहाबाद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की है।
2010 से 2015 मध्यप्रदेश के खरगौन और रीवा जिले में पब्लिक प्रॉसिक्यूट रहे। 2015 से 2020 तक उत्तर प्रदेश के रामपुर और बदायूं जिले में पब्लिक प्रॉसिक्यूट रहे। 2020 से 2025 तक गाजियाबाद और उन्नाव में एडीजे रहे। अप्रैल 2026 में मेरठ में एडीजे 12 का पद संभाल रहे है
131 पन्नों का जजमेंट, जज ने मनुस्मृति और आत्रेय संहिता के श्लोकों का जिक्र किया
मेरठ सांपकांड में जज ने 131 पन्नों के फैसले की शुरुआत मनुस्मृति और आत्रेय संहिता के श्लोकों के अर्थ बताते हुए की। इन श्लोकों के जरिए दंड, न्याय और निष्पक्षता के महत्व को समझाया।
मनुस्मृति - अध्याय-7 (राजधर्म) 22 वां श्लोक-
सर्वो दण्डजितो लोको दुर्लभो हि शुचिर्नरः। दण्डस्य हि भयात् सर्वं जगद् भोगाय कल्पते।
हिंदी अनुवाद- दण्ड के भय से ही यह सम्पूर्ण जगत नियंत्रण में रहता है, यदि दण्ड न हो तो दुष्ट व्यक्ति सज्जनों को खा जाएंगे।
आत्रेय संहिता के श्लोक-26
दष्टस्य दण्डः सुजनस्य पूजा न्यायेन कोशस्य च सम्प्रवृद्धिः ।अपक्षपातोऽर्थिषु राष्ट्ररक्षा पञ्चैव यज्ञाः कथिता नृपाणामः ॥
हिंदी अनुवाद- दुष्टों को दंड देना, सज्जन पुरुषों का सम्मान करना, न्यायपूर्वक नीति से राज्य के सम्मान में वृद्धि करना, न्याय मांगने आए लोगों के साथ बिना किसी पक्षपात के निष्पक्ष व्यवहार करना और अपने राष्ट्र की रक्षा करना - ये ही न्याय व्यवस्था के पांच मुख्य गुण माने गए हैं।
मेरठ सांपकांड में कोर्ट ने 131 पन्नों के फैसले में दामिनी-अतुल और इल्मा-तालिब केस का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ शरीर के टुकड़े करना ही जघन्य अपराध नहीं है, अमरदीप और रविता ने तो आत्माओं के टुकड़े किए हैं।
दामिनी-अतुल पंवार का मामला जुलाई 2026 में हस्तिनापुर क्षेत्र में हुई अतुल की हत्या से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, दामिनी ने अपने कथित प्रेमी तुषार उर्फ निक्की और दो सपेरों के साथ मिलकर अतुल की हत्या की साजिश रची थी। आरोप था कि हत्या को सांप के डसने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई।
मेरठ के इल्मा-तालिब केस में पत्नी इल्मा पर अपने कथित प्रेमी अमन के साथ मिलकर तालिब की हत्या करने का आरोप लगा। आरोप था कि हत्या को हार्ट अटैक से हुई मौत बताकर छिपाने की कोशिश की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला दबाने से मौत की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
अमित के भाई सोनू ने कहा कि वे अदालत के फैसले से बहुत खुश हैं। आरोपियों ने जिस तरह का अपराध किया, उसके लिए उन्हें फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए थी, ताकि भविष्य में ऐसा अपराध करने से पहले कोई भी सौ बार सोचे।
अमित के भाई और मां ने फैसले को न्यायोचित बताते हुए भाई सोनू ने बताया कि अमित की दो बेटियां और एक बेटा है। तीनों का पालन-पोषण परिवार के लोग और उनके चाचा मजदूरी करके कर रहे हैं। अगर दोषी इस फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हैं, तो परिवार आगे भी कानूनी लड़ाई लड़ेगा। वे हत्यारों को फांसी की सजा दिलाने के लिए अंत तक लड़ेंगे।
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