आर के पाण्डेय एडिटर इन चीफ बैज़लपुर उत्तर प्रदेश / Fri, Apr 24, 2026 / Post views : 35
युद्ध शुरू होने के 24 घंटो के अंदर ही अपनी क्षमता का 90% साजो सामान खो देने और अपने नेतृत्व की तीन तीन परत खोने के बाद जब इनका जंगजू कौम होने का वहम दूर हुआ तब ईरान ने रणनीति बदली और युद्ध को आर्थिक मोर्चे पर ले गए! सऊदी, ओमान, UAE, बहरीन, कतर और अन्य तेल उत्पादक देशों की ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाना और होर्मुज को ब्लॉक करना इसी रणनीति का हिस्सा था कि युद्ध दुनिया के लिए आर्थिक संकट पैदा कर दे और दुनिया अमेरिका से गुहार लगाए कि भाई छोड़ दो इनको! ईरान का अमेरिका के लिए जीत को इतना महंगा कर देना चाहता था कि जीत भी अमेरिका को हार जैसी लगे! यह रणनीति कुछ हद तक कामयाब भी रही! अमेरिका पानी की तरह पैसा बहाता रहा और ईरान की सेना बंकरो ने घुस कर बैठ गई!
सीजफायर के बहाने से अमेरिका ने जो ईरान की इस रणनीति का तोड़ निकाला है वह गजब है... मतलब गजब ही है! शांतिवार्ता के लिए ईरान के नेतृत्व का पाकिस्तान आ जाना ही ईरान की हार की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति समझा जाना चाहिए! लेकिन अमेरिका जो कर रहा है उसे समझने की जरूरत है!
1. ईरान की रणनीति यहाँ आकर खत्म हो जाती है कि युद्ध अमेरिका के लिए महंगा हो जाए, अमेरिका ने पाकिस्तान के रूप मे एक सस्ते गुंडे को ईरान की सुपारी देकर इस रणनीति की हवा ही निकाल दी है! इधर चंद डॉलर पाकिस्तान के सरकारी बैंक में क्रेडिट हुए और उधर पाकिस्तान की सेना सऊदी में जाकर बैठ गई! अब थोड़ा थोड़ा पैसा पाकिस्तान के खाते में क्रेडिट होता रहेगा और पाकिस्तान इन चंद टुकड़ो के लिए ईरान को जहन्नुम बना देगा! महंगे युद्ध का झंझट ही खत्म! पाकिस्तान में हालात ऐसे हुए पड़े है कि जहाँ शांतिवार्ता हुई थी उस होटल का बिल तक पाकिस्तान की सरकार से चुकाया नही गया! होटल का बिल पहले पाकिस्तान की सरकार को भेजा गया जब वहाँ से पैसा नहीं मिला तो बिल अमेरिका को भेजा गया जब खबर मीडिया मे लीक हो गई तो इस अपमानजनक स्तिथि से बचने के लिए होटल के मालिक ने ही अपने ही होटल का बिल भरा! ये लोग नून तेल हल्दी चून दाल भात के लिए लड़ने को तैयार हो जाए 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तो फिर भी बहुत बड़ी बात है, इतना पैसा इनकी खुद ही अर्थव्यवस्था से अगले 5 साल में भी नही निकलेगा! तो युद्ध के अंधे खर्चे की चिंता खत्म!
2. ईरान की दूसरी रणनीति या मजबूरी कह लीजिये वह था होर्मुज को ब्लॉक करना ताकि पैसा भी आये दबदबा भी रहे और जब दिल करे दुनिया की अर्थव्यवस्था का गला दबा दो.... ठीक! अमेरिका ने कहा कि यह कैसा ब्लोकेड है जहाँ तुम ओरो के जहाज रोक रहे हो और खुद के ऑयल टैंकर भर भर कर चीन भारत को बेच रहे हो? ब्लोकेड क्या होता है हम तुमको बताते है! अमेरिका ने होर्मुज को सबके लिए बंद कर दिया! दुनिया को परेशानी हो सकती है पर यह शानदार कदम है! ईरान का तेल नही बिकेगा तो पैसा नही आयेगा! अब करो ब्लोकेड! यह ईरान के लिए असहनीय दर्द हो सकता हैं क्योंकि कमाई के नाम पर उनके पास पेट्रो युआन ही बचा था! तो जो फंदा IRGC ने दुनिया के लिए बनाया था फिलहाल खुद उसी पर लटका हुआ है!
और हाँ, अभी अमेरिका इस्राएल ने अभी सैन्य विकल्प को ना नही कहा है! किसी भी दिन हम सोकर उठेंगे समाचार देखेंगे और पता चलेगा कि अमेरिका ने फिर ठोक दिया है हालाँकि इसकी जरूरत नही है उपर के दो काम ही ईरान का काम तमाम करने के लिए काफी है!
आगे क्या होने वाला है -
अमेरिका जानता है कि कभी न कभी तो उसे यहाँ से जाना ही है उसके बाद भी तो ईरान होर्मुज को ब्लॉक कर सकता हैं! उसका तोड़ ढूंढा जा रहा है! ऐसा लग रहा है कि शायद भारत को भी युद्ध मे खीचने की कोशिश हो सकती हैं या हो रही हैं! भारतीय ऑयल टैंकरो को लगातार निशाना बनाया जाना इसी तरफ संकेत कर रहा है कि शायद उनको उम्मीद है कि भारत अपनी नेवी उतार दे और अपने दम पर होर्मुज खुलवाये क्योंकि हमको परेशानी ओरो से ज्यादा है! संभवतः IRGC ने भारतीय जहाजों को निशाना बनाया होगा पाकिस्तान के कहने पर लेकिन वे भूल रहे हैं कि पाकिस्तान अब वही कर रहा है जो अमेरिका करवा रहा है!
भारत के दृष्टिकोण से -
1- युद्ध चलता रहना चाहिए
2- हमको इस युद्ध मे पड़ना नही है
3- ऊर्जा आवश्यकता का वैकल्पिक समाधान निकले
4- पाकिस्तान की सेना युद्ध मे सक्रिय भूमिका में आये
5- इस्लामिक NATO अस्तित्व में आये बस
एक बात ओर ... ईरान का इस्लामिक शासन हमारा दीर्घकालिक शत्रु है, जब फैसले की घडी आयेगी तब ये सारे लोग उस ओर खड़े मिलेंगे अतः यह उचित है कि सही समय पर शत्रुबोध अर्थात शत्रु की पहचान हो जाए और निर्णायक अवसर पर कोई किंतु परन्तु ना रहे!
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