आर के पाण्डेय एडिटर इन चीफ बैज़लपुर उत्तर प्रदेश / Fri, Jan 13, 2023 / Post views : 118
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बिहार के शिक्षा मंत्री प्रो.चंद्रशेखर के द्वारा रामचरितमानस पर दिए गये विवादित बयान का मामला गर्माता जा रहा है जगह जगह लगातार विरोध किया जा रहा.मिर्ज़ापुर में भी हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर का पुतला फूंक कर भारत सरकार से मुकदमा दर्ज करा कर जेल भेजने और बिहार सरकार से पार्टी से बर्खास्त करने की मांग की हैं.
बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह का हिंदू युवा वाहिनी ने मिर्ज़ापुर के चौबे टोला में शुक्रवार को फूंका पुतला, श्रीरामचरित्र मानस को नफरत फ़ैलाने वाला बताने पर भड़के हिंदू युवा वाहिनी कार्यकर्ता .नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने किया था अमर्यादित टिप्पणी, बिहार सरकार से मंत्री को बर्खास्त किए जाने और मुकदमा दर्ज करा कर जेल भेजने का की मांग.
दरअसल नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर सिंह द्वारा श्रीरामचरितमानस पर नफरत फैलाने वाला बताए जाने पर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने उनका पुतला दहन किया. हिंदू युवा वाहिनी के निवर्तमान जिला संयोजक के नेतृत्व में जुटे कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया और बिहार सरकार से मंत्री को बर्खास्त किए जाने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री ने यह कहकर नही सिर्फ सनातन आस्था का अपमान किया बल्कि अपने बौद्धिक अज्ञानता का परिचय दिया है उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और जेल भेजा जाए.
क्या था पूरा मामला
प्रोफेसर चंद्रशेखर ने रामचरितमानस ग्रंथ को लेकर कहा था समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है.समाज में पिछड़ों, महिलाओं और दलितों को शिक्षा हासिल करने से यह ग्रन्थ रोकता है.साथ ही कहा था बाबा साहब अंबेडकर भी मनुस्मृति के खिलाफ थे. मनुस्मृति के बाद रामचरितमानस ने नफरत के इस दौर को आगे बढ़ाया.साथ ही रामचरितमानस की दूसरी चौपाई ‘पूजहि विप्र सकल गुण हीना, शुद्र न पूजहु वेद प्रवीणा’ सुनाई.चौपाई का अर्थ बताते हुए कहा था ब्राह्मण चाहे कितना भी ज्ञान गुण से रहित हो, उसकी पूजा करनी ही चाहिए और शूद्र चाहे कितना भी गुणी ज्ञानी हो वह सम्माननीय हो सकता है लेकिन कभी पूजनीय नहीं हो सकता है. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर भले संविधान निर्माता बने हो लेकिन इस ग्रंथ के अनुसार वे पूजनीय नहीं हो सकते हैं. ऐसा ग्रंथ समाज में नफरत ही फैला रहे हैं।
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