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नीरज कुमार सिंह संवाददाता परसपुर गोंडा / Thu, Oct 22, 2026 / Post views : 36

व्यवस्था की नब्ज टटोलती रहीं जनकवि की गजलें, जयंती पर ‘गजलगोई अदम गोंडवी’ पुस्तक का विमोचन; मरणोपरांत पद्मश्री देने की उठी मांग

परसपुर (गोंडा)। गांव की पगडंडियों से उठकर देश के साहित्यिक मंचों तक पहुंचने वाले जनकवि अदम गोंडवी की कलम ने हमेशा उस आम आदमी की आवाज बुलंद की, जिसकी पीड़ा अक्सर व्यवस्था के शोर में दब जाती है। उनकी गजलों में भूख का दर्द है, किसान की बेबसी है, सामाजिक विषमता पर सवाल हैं और सत्ता के सामने सच कहने का साहस भी। यही कारण है कि उनके शब्द आज भी समाज को आईना दिखाते हैं। गुरुवार को उनकी 79वीं जयंती पर पैतृक गांव आंटा के गजराज पुरवा स्थित समाधि स्थल पर श्रद्धा के फूल चढ़े तो उनके साहित्य, संघर्ष और जनसरोकारों की स्मृतियां भी ताजा हो उठीं। विकासखंड परसपुर की ग्राम पंचायत आंटा स्थित अदम गोंडवी प्राथमिक विद्यालय परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में परिजनों, ग्रामीणों और साहित्यप्रेमियों ने समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर जनकवि को नमन किया। उनकी पत्नी कमला देवी, पुत्र आलोक सिंह और परसपुर विकास मंच के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह सहित उपस्थित लोगों ने उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि अदम गोंडवी की रचनाएं केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर हैं।

गजलों में दर्ज है समाज का सच
अदम गोंडवी की रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने साहित्य को आम आदमी के जीवन से जोड़ा। उनकी चर्चित पंक्तियां ‘काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास में, उतरा है रामराज विधायक निवास में’ सत्ता और सामाजिक विषमता पर तीखा व्यंग्य करती हैं। वहीं, ‘भूख के एहसास को शेरो-सुखन तक ले चलो’ जैसी पंक्तियां बताती हैं कि साहित्य का सरोकार केवल कल्पनाओं से नहीं, बल्कि उन लोगों की जिंदगी से भी होना चाहिए, जिनके हिस्से में संघर्ष और अभाव आते हैं। उनकी गजलों में गांव की मिट्टी की महक के साथ सामाजिक बदलाव की बेचैनी भी दिखाई देती है। श्रद्धांजलि सभा में डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अदम गोंडवी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से गांव, गरीब, किसान और समाज के वंचित वर्ग की आवाज को व्यापक पहचान दिलाई। उन्होंने आम आदमी की समस्याओं को ऐसी सहज भाषा में व्यक्त किया, जो सीधे दिल और दिमाग तक पहुंचती है। उनकी रचनाएं आज भी सामाजिक न्याय, समानता और व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल खड़ा करती हैं। उन्होंने जनकवि को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिए जाने की मांग भी उठाई।

‘गजलगोई अदम गोंडवी’ पुस्तक का विमोचन
जयंती समारोह में अदम गोंडवी की गजलों पर आधारित पुस्तक ‘गजलगोई अदम गोंडवी’ का उनकी पत्नी कमला देवी, पुत्र आलोक सिंह और परसपुर विकास मंच के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह ने विमोचन किया। नई दिल्ली से प्रकाशित इस पुस्तक का संपादन साहित्यकार ओम निश्चल ने किया है। पुस्तक में जनकवि की गजलों को नए कलेवर में प्रस्तुत किया गया है। इसके विमोचन को उनके साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। अदम गोंडवी प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर जनकवि को श्रद्धांजलि दी।
खेती-किसानी से जुड़कर रचा जनचेतना का साहित्य
22 अक्टूबर 1947 को आंटा गांव में जन्मे अदम गोंडवी का मूल नाम रामनाथ सिंह था। खेती-किसानी से जुड़े रहने के बावजूद उन्होंने अपनी गजलों के जरिए हिंदी साहित्य में विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, गरीबी, शोषण, आर्थिक असमानता और आम आदमी के संघर्षों का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। सहज शब्दों में गहरी बात कहने की उनकी शैली ने उन्हें साहित्यिक मंचों और कवि सम्मेलनों में अलग पहचान दिलाई। ‘धरती की सतह पर’, ‘समय से मुठभेड़’ और ‘गर्म रोटी की महक’ उनके चर्चित गजल संग्रहों में शामिल हैं। अदम गोंडवी की जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने एक बार फिर याद दिलाया कि सच्चा साहित्य अपने समय के सवालों से मुंह नहीं मोड़ता। जनकवि के शब्द आज भी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने, समाज की विसंगतियों को पहचानने और आम आदमी के सम्मान की बात करने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर बृजेश सिंह, राकेश शुक्ल, सुनीता सिंह, उषा श्रीवास्तव, अवनीश सिंह, हरिओम सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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