नीरज कुमार सिंह संवाददाता परसपुर गोंडा / Sun, Jun 2, 2024 / Post views : 54
परसपुर गोण्डा : विकास खण्ड परसपुर क्षेत्र के सहायक कृषि विकास अधिकारी अनूप सिंह चौहान ने क्षेत्रीय किसानों को बीज शोधन व बीजो का उपचार करने के पश्चात बोने की बात कहते हुए जानकारी देते हुए बताया कि सर्वप्रथम पानी में नमक का दो प्रतिशत का घोल तैयार करें, जिसमे 20 ग्राम नमक को एक लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाएं। इनमें बुवाई के लिए काम में आने वाले बीजों को डालकर कुछ देर तक हिलाये, जिससे हल्के व रोगी बीज घोल में तैरने लगेंगे।इन्हें निथार कर (छानकर) अलग करते हुये तली में बैठे बीजों को साफ पानी से धोकर सुखा लें।फिर फफूंदनाशक, कीटनाशक व जीवाणु कल्चर से उपचारित करने के उपरान्त ही बुवाई करें।

सहायक विकास अधिकारी कृषि (अनूप सिंह )
विकासखंड परसपुर
श्री सिंह ने बताया कि बाविस्टीन, कैप्टान या थीरम की दो-तीन ग्राम प्रति किग्रा या ट्राइकोडर्मा 10 ग्राम प्रति किग्रा. के साथ पीएसबी कल्चर छह ग्राम और एजेटोबैक्टर कल्चर छह ग्राम प्रति किग्रा बीज के हिसाब से उपचारित कर नम जूट बैग के ऊपर छाया में फैला देना चाहिए।इसके बाद उस बीज का प्रयोग नर्सरी में करना चाहिए।जिससे बीज सौ प्रतिशत अंकुरित होता है और पौधे भी स्वस्थ्य व निरोग रहते है।
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