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गोंडा : अखिल भारतीय कुश्ती दंगल में लक्ष्मणदास की शानदार जीत, गामा–जोगेंद्र का मुकाबला बराबरी पर छूटा

परसपुर (गोण्डा)। नगर पंचायत परसपुर स्थित तुलसी स्मारक इंटर कॉलेज के खेल मैदान परिसर में महंथ मुरारीदास जी की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय कुश्ती दंगल प्रतियोगिता का भव्य समापन उत्साह और रोमांच के साथ हुआ, जिसमें देश के विभिन्न प्रदेशों से आए नामचीन पहलवानों ने अखाड़े में अपने दांव-पेंच और दमखम का शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों को खूब रोमांचित किया। दो दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित आयोजन में कुल 11 कुश्तियां कराई गईं, जिनमें पांच मुकाबले निर्णायक रहे जबकि छह मुकाबले बराबरी पर समाप्त हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक प्रतिनिधि सूरज सिंह द्वारा पहलवानों को साफा बांधकर किया गया। प्रतियोगिता की पहली कुश्ती में गाजीपुर के श्याम सुंदर ने राजस्थान के संदीप पहलवान को पराजित कर विजयी आगाज किया। इसके बाद कौड़िया के रामानंद ने बाराबंकी के आयुष पहलवान को मात दी। अवध धाम से आए लक्ष्मणदास पहलवान ने उत्तराखंड के सोनू पहलवान को मात्र 30 सेकेंड में करारी पटखनी देकर अखाड़े में तालियां बटोरीं, वहीं बाद में सोनू पहलवान ने बरेली के मंशा पहलवान को पराजित कर अपनी मजबूत वापसी दर्ज कराई। फिरोजाबाद के लव पहलवान ने गाजीपुर के निरहू पहलवान को शिकस्त दी।

दंगल का मुख्य आकर्षण हनुमानगढ़ी अयोध्या के अवधकेसरी गामा पहलवान और मथुरा के वृजकेसरी जोगेंद्र पहलवान के बीच हुआ मुकाबला रहा, जिसमें दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे पर एक से बढ़कर एक दांव आजमाए, लेकिन लंबे और कड़े संघर्ष के बाद यह बहुप्रतीक्षित कुश्ती बराबरी पर छूट गई। अन्य बराबरी के मुकाबलों में विनोद सिंह गाजीपुर बनाम लव फिरोजाबाद, विनोद गाजीपुर बनाम श्याम पहलवान फिरोजाबाद, गोलू दिल्ली बनाम रवि झांसी, गुल्ला गुर्जर उत्तराखंड बनाम स्टील बॉडी हरिद्वार तथा भीम आगरा बनाम गोलू गोण्डा शामिल रहे। प्रतियोगिता में एनाउंसमेंट का दायित्व वसीम टाइगर गाजीपुर और शिव विलास पहलवान बांदा ने संभाला, जबकि रेफरी की भूमिका मनोज उर्फ शैतान पहलवान बुंदेलखंड ने निभाई। आयोजन के दौरान अनुज सिंह पुत्ती सिंह , मोनू सिंह, जितेंद्र सिंह, राजेश सिंह ‘राजू मास्टर’, कृष्ण कुमार सिंह, जादूगर मिस्टर इंडिया, राजू प्रधान, बबलू सिंह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक, खेल प्रेमी और ग्रामीण दर्शक मौजूद रहे। सफल कुश्ती दंगल ने ग्रामीण खेल संस्कृति को नई ऊर्जा दी और पारंपरिक भारतीय अखाड़े की गौरवशाली परंपरा को जीवंत किया।

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