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: गोंडा : श्रद्धा और आस्था का केंद्र है मां बाराही देवी का मंदिर

नीरज कुमार सिंह संवाददाता परसपुर गोंडा / Fri, Mar 24, 2023 / Post views : 2013

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गोंडा :आज नवरात्र का तीसरा दिन है। गोण्डा जिले के देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु जुटना शुरू हो गए हैं, लेकिन बाराही देवी धाम की बात ही निराली है। जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित तरबगंज तहसील के सूकर क्षेत्र के मुकुंदपुर में शक्तिपीठ बाराही देवी का मंदिर है। नवरात्रि के दिनों में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। बताया जा रहा है कि इस स्थान पर बाराही मां के दर्शन मात्र से ही भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। यह मंदिर एकता एवं अखंडता का केंद्र है। मुस्लिम संप्रदाय के लोग भी यहां दर्शन करने आते हैं।
आंख की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति यहां करते हैं कल्पवास
मंदिर से निकले वटवृक्ष जो करीब एक एकड़ भूमि में फैले हुए हैं। मान्यता है कि नवरात्र माह में आंख से पीड़ित व्यक्तियों द्वारा यहां कल्पवास करने व मन्दिर का नीर एवं बरगद का दुग्ध आखों पर लगाने से आंखों की ज्योति पुनः वापस आ जाती है। मंदिर में दर्शन के लिए आस-पास के जनपदों के अलावा दूसरे प्रदेश से भारी संख्या में लोग आते हैं। मां बाराही मंदिर को उत्तरी भवानी के नाम से भी जाना जाता है ।


मंदिर के संबंध में दो किवदंतियां प्रचलित हैं। एक में कहा गया है कि माता सती का यहां जबड़ा गिरा था, जिससे यह सिद्ध पीठ मंदिर है। वहीं दूसरी किवदंती वाराह पुराण के अनुसार, जब हिरण्य कश्यप के भाई हिरण्याक्ष का पूरे पृथ्‍वी पर आधिपत्‍य हो गया था। देवताओं, साधू-संतों और ऋषि मुनियों पर अत्‍याचार बढ़ गया था तो हिरण्याक्ष का वध करने के लिए भगवान विष्णु को वाराह का रूप धारण करना पड़ा था। भगवान विष्णु ने जब पाताल लोक पंहुचने के लिए शक्ति की आराधना की तो मुकुंदपुर में सुखनोई नदी के तट पर मां भगवती बाराही देवी के रूप में प्रकट हुईं। इस मंदिर में स्थित सुरंग से भगवान वाराह ने पाताल लोक जाकर हिरण्याक्ष का वध किया था। तभी से यह मंदिर अस्तित्व में आया। इसे कुछ लोग बाराही देवी और कुछ लोग उत्‍तरी भवानी के नाम से जानने लगे। मंदिर के चारों तरफ फैली वट वृक्ष की शाखाएं इस मंदिर के अति प्राचीन होने का प्रमाण हैं।
मंदिर में वैसे तो प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को मेला लगता है, लेकिन नवरात्रि में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर प्रांगण में दो दर्जन छोटे-छोटे मंदिर और धर्मशालाएं हैं, जिन्हें मन्नतें पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं ने बनवाया है। यहां पर हर समय कोई न कोई भक्त भागवत कथा सुनता रहता है। यहां मुण्‍डन से लेकर अनेक शुभ संस्‍कार कराए जाते हैं। नवरात्र के दौरान उत्तरी भवानी में भारी संख्‍या में दुकानें, बाजार और सर्कस आदि लगे रहते हैं।

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