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उत्तरप्रदेश

दिल्ली एनसीआर में गाजियाबाद सबसे प्रदूषित शहर ;गाजियाबाद बना गैस का चेंबर ;बूढ़े बच्चे बीमार आंखों में जलन और सांस लेने में हो रही है दिक्कत- प्रशासन मूकदर्शक

दिल्ली-एनसीआर में एक दिन की राहत के बाद मंगलवार को हवा की चाल व मौसमी कारकों के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) फिर से गंभीर स्तर की श्रेणी में पहुंच गया। एनसीआर में शामिल गुरुग्राम को छोड़कर दिल्ली समेत अन्य शहरों का औसत एक्यूआई 400 से अधिक दर्ज किया गया

अगले 24 घंटे में भी प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

सफर के मुताबिक, बीते 24 घंटे में पराली जलने की घटनाओं में कमी हुई है। मंगलवार को पड़ोसी राज्यों में पराली जलने से धुएं की प्रदूषण में 27 फीसदी हिस्सेदारी रही। इससे एक दिन पहले यह 30 फीसदी रही थी। इस सीजन में सबसे अधिक पराली जलने की 48 फीसदी हिस्सेदारी रविवार को दर्ज की गई थी। पराली जलने की कम घटनाओं के बाद भी हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर सफर का कहना है कि बादल छाए रहने और मिक्सिंग हाइट कम होने की वजह से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है।

बीते 24 घंटे में उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली हवा की रफ्तार कम हुई है, लेकिन हवा की दिशा पराली का धुआं दिल्ली-एनसीआर के शहरों तक पहुंचाने के लिए अनुकूल बनी हुई है। अगले 24 घंटे में भी हवा की गुणवत्ता में अधिक बदलाव की संभावना नहीं है। सफर का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में भी हवा गंभीर से बहुत खराब श्रेणी में बनी रहेगी।

मंगलवार को हवा में पीएम 10 का स्तर 370 व पीएम 2.5 का स्तर 226 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। दिवाली के बाद से हवा की गुणवत्ता लगातार चिंताजनक स्थिति में बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 14 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 404 रहा। इससे एक दिन पहले यह 390 था।

एनसीआर में सबसे गंभीर हालात गाजियाबाद के बने हुए हैं। बीते एक दिन के मुकाबले गाजियाबाद का एक्यूआई 451 रहा, जो कि एनसीआर में सर्वाधिक है। इससे एक दिन पहले यह 437 रिकॉर्ड किया गया था। गुरुग्राम का एक्यूआई 368 के आंकड़े के साथ बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।

गली-मोहल्लों से भी बढ़ रहा है प्रदूषण
सफर ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में गली मोहल्लों से लेकर अन्य तरह की 26 गतिविधियों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गली में घूमने वाली रेहड़ियां, होटल, ढाबा, स्पीड ब्रेकर व झुग्गी झोपड़ी भी प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। रेहड़ी-पटरी से लेकर जहां ढाबों और होटलों में कोयले व लकड़ी का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, खुले में कूड़ा व अन्य पदार्थ भी जलाए जा रहे हैं। इसके अलावा डीजल जनरेटर, मोबाइल टॉवर को चलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन, श्मशान घाट, पावर प्लांट, स्कूल-कॉलेज में पहुंचने वाले छात्रों की संख्या व वाहनों का भार, अस्पतालों में पहुंचने वाले बाहरी रोगी व वाहनों के दबाव के साथ डीजल जनरेटर का उपयोग, एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशन में पहुंचने वाली यात्रियों की संख्या को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार माना गया है। इसके अलावा निर्माण गतिविधियों और पर्यटन स्थलों पर बढ़ने वाले वाहनों के दबाव के कारण भी हवा खराब हो रही है।

कहां-कितना रहा एक्यूआई
नौ नवंबर आठ नवंबर
दिल्ली 404 390
फरीदाबाद 430 360
गाजियाबाद 451 437
ग्रेटर नोएडा 412 328
गुरुग्राम 368 369
नोएडा 426 412

पीएम 2.5 में प्रदूषण की हिस्सेदारी
परिवहन 41 फीसदी
उद्योग 22.3 फीसदी
ऊर्जा 3.1 फीसदी
आवासीय 5.7 फीसदी
निर्माण स्थल 18.1 फीसदी
अन्य 11.7 फीसदी

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