गोंडा : “फटे कपड़ों में तन ढांके गुजरता है जहां कोई, समझ लेना वो पगडंडी अदम के गांव जाती है”


परसपुर ( गोंडा ) : 22 अक्टूबर 1947 को गोस्वामी तुलसीदास के गुरु स्थान सूकर क्षेत्र अंतर्गत आटा में जन्मे जनकवि रामनाथ सिंह ‘अदम गोंडवी’ की 14वीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को उनके पैतृक गांव आटा पूरे गजराज में साहित्य, संघर्ष और सामाजिक चेतना का संगम देखने को मिला। अदम गोंडवी प्राथमिक विद्यालय परिसर स्थित उनकी समाधि पर आयोजित विचार गोष्ठी में साहित्यकारों, कवियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद मिश्रा ने अदम गोंडवी की चर्चित पंक्तियां—“आग बरसाती है मित्रों जो क्षितिज के छोर से, कितनी उम्मीदें जुड़ी थीं उस सुहानी भोर से”—का पाठ किया और कहा कि अदम गोंडवी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से गरीबों, शोषितों और वंचितों की पीड़ा को ईमानदारी से शब्द दिए।

उन्होंने कहा कि अदम के विचारों के रास्ते पर एक कदम भी चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।उन्होंने अदम की पंक्तियां “मेरी खुद्दारी ने अपना सिर झुकाया दो जगह, वह कोई मजलूम हो या साहिबे किरदार हो” का उल्लेख करते हुए कहा कि अदम की कविता आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय की आवाज है।मशहूर शायर याकूब अज्म ने अपनी रचना “अदम का नाम जिंदा है, अदम का काम जिंदा है, अदम ने जो दिया दुनिया को वह पैगाम जिंदा है” प्रस्तुत कर कहा कि अदम गोंडवी की ग़ज़लें आज भी आम आदमी के संघर्ष, गुस्से और उम्मीद की अभिव्यक्ति हैं। उनकी रचनाएं सत्ता और व्यवस्था के सामने सच कहने का साहस देती हैं, यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।

परसपुर विकास मंच के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अदम गोंडवी केवल कवि नहीं, बल्कि जनचेतना की जीवित धड़कन थे। उन्होंने अदम गोंडवी को पद्म विभूषण सम्मान दिए जाने की मांग दोहराते हुए कहा कि उनका साहित्य आज भी समाज को आईना दिखाता है और नई पीढ़ी को सच के साथ खड़े होने की प्रेरणा देता है।उन्होंने गांव की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जिस बदहाली, टूटती सड़कों, खराब हैंडपंप और बंद पड़ी सोलर लाइटों पर अदम ने वर्षों पहले लिखा था, वह तस्वीर आज भी पूरी तरह नहीं बदली है। जिस बरगद के नीचे बैठकर अदम गोंडवी अपनी रचनाएं लिखा करते थे, वह आज भी गांव में खड़ा होकर उनके विचारों की याद दिलाता है।
इस अवसर पर अदम गोंडवी के भतीजे दिलीप गोंडवी ने कहा—“फटे कपड़ों में तन ढांके गुजरता है जहां कोई, समझ लेना वो पगडंडी अदम के गांव जाती है।” उन्होंने बताया कि अदम गोंडवी की चर्चित रचनाओं का अंग्रेजी अनुवाद पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है, जिससे उनकी विचारधारा अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुंच रही है। उन्होंने इसे अदम गोंडवी की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि अदम गोंडवी की कविताएं केवल साहित्य नहीं, बल्कि गांव, गरीबी, अन्याय और संघर्ष की जीवंत तस्वीर हैं। उनकी रचनाएं आज भी बताती हैं कि कविता समाज को झकझोरने और सोच बदलने की ताकत रखती है। कार्यक्रम के दौरान अदम गोंडवी की रचनाओं का पाठ हुआ, जिसे सुनकर श्रोता भावुक हो उठे।

श्रद्धांजलि सभा में अदम गोंडवी की पत्नी कमला देवी, भतीजे दिलीप गोंडवी, कांग्रेस नेता प्रमोद मिश्रा, परसपुर विकास मंच के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, शायर याकूब अज्म, अजीत प्रताप सिंह, रघुनाथ पांडेय, कृष्ण कुमार सिंह दीप, जादूगर मिस्टर इंडिया, राकेश कुमार शुक्ला , हंसराज सिंह, प्रेम नारायण सिंह, बृजेश सिंह, जानकी सिंह, रामदेव सिंह, रितेश सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिक्षक और साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। अंत में “अदम गोंडवी अमर रहें” के गगनभेदी नारों के साथ श्रद्धांजलि कार्यक्रम का समापन हुआ।



