गोंडा : वाराह जयंती पर गूंजे जयकारे, सुन्दरकाण्ड पाठ व हवन-पूजन का कार्य संपन्न

परसपुर गोण्डा: विकास खंड परसपुर अंतर्गत सूकर खेत पसका स्थित भगवान वाराह मंदिर में सोमवार को वाराह जयंती का पर्व भक्तिभाव, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता मंदिर प्रांगण में उमड़ पड़ा। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में सजकर भगवान वाराह के दर्शन और पूजन के लिए मंदिर पहुंचे। चारों ओर भक्ति का वातावरण और “जय वाराह भगवान” के जयघोष से क्षेत्र गुंजायमान होता रहा। वाराह जयंती पर मंदिर परिसर श्रद्धा, विश्वास और धर्मभाव की आभा से आलोकित रहा। श्रद्धालु मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन में लीन होकर प्रभु की महिमा का गुणगान करते रहे। भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लिया था। मान्यता है कि दैत्य हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को पाताल में छिपा दिया था, तब भगवान ने सूकर रूप में अवतरित होकर उसका वध किया और पृथ्वी माता को अपने दंतों पर उठाकर बाहर निकाला। माना जाता है कि यह अवतार केवल पृथ्वी की रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय और संतुलित सृष्टि व्यवस्था के पुनर्स्थापन के लिए हुआ था।

भगवान वाराह जयंती के अवसर पर श्रीरामचरितमानस कृत सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन श्रद्धालुओं की सामूहिक सहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ। पाठ के दौरान मंदिर परिसर “जय श्रीराम” और “जय वाराह भगवान” के जयघोषों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं की श्रद्धा देखते ही बन रही थी। वाराह जयंती के पावन अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर दीपों, धूप, पुष्पों और रंगोली से सजाया गया था। पूजा-पाठ के उपरांत विधिविधान से आरती व हवन-पूजन किया गया और तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर श्रद्धालुओं को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। भक्तों ने सामूहिक भजन-कीर्तन में भाग लेकर वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर होकर भगवान वाराह के जयकारों के साथ झूमते रहे। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि यह पर्व केवल परंपरा नहीं, अपितु सजीव आस्था का पर्व है। आयोजन में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने इस पर्व को पूर्ण धार्मिक आस्था का उत्सव बना दिया। मंदिर के पुजारी ने श्रद्धालुओं को वाराह अवतार की महिमा व उससे जुड़ी पौराणिक गाथा का संक्षिप्त विवरण भी सुनाया। वाराह जयंती पर की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है।