गोंडा : सार्वजनिक स्थलों पर ठंड से बचाव के नाम पर खर्च हुई राशि, हीटरों का अता-पता नहीं


डीएम के निर्देश पर नगर क्षेत्रों में लगाए गए गैस हीटर गायब, आरटीआई से प्रशासन पर उठे सवाल

सार्वजनिक स्थलों पर ठंड से बचाव के नाम पर खर्च हुई राशि, हीटरों का अता-पता नहीं

सरकारी धन के दुरुपयोग, लापरवाही या संभावित गड़बड़ी की आशंका

गोंडा। जनपद में ठंड से बचाव और प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से नगर क्षेत्रों के सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए गैस हीटर अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी नेहा शर्मा के निर्देश पर वर्ष 2024–2025 में शुरू की गई इस योजना के तहत लगाए गए गैस हीटरों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट न होने पर नगर पालिका परिषद कर्नलगंज के एक नागरिक ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आरटीआई आवेदन दाखिल कर प्रशासन से जवाबदेही मांगी है। मौर्य नगर, कर्नलगंज निवासी सुरेंद्र सिंह छाबड़ा द्वारा लोक सूचना अधिकारी/जिलाधिकारी कार्यालय गोंडा को भेजे गए आरटीआई आवेदन में पूछा गया है कि जिलाधिकारी के आदेश पर जनपद की विभिन्न नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों में कुल कितने गैस हीटर खरीदे गए और उन्हें किन-किन सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित किया गया। विशेष रूप से नगर पालिका परिषद कर्नलगंज में लगाए गए गैस हीटरों की संख्या और उनके वर्तमान स्थान की जानकारी मांगी गई है। आरटीआई में यह भी सवाल उठाया गया है कि वर्तमान समय में ये गैस हीटर कहां हैं—क्या वे अभी उपयोग में हैं या हटा दिए गए हैं। यदि हटा दिए गए हैं, तो उसके पीछे क्या कारण रहे। साथ ही हीटरों की खरीद, स्थापना, संचालन और रखरखाव पर कुल कितनी सरकारी धनराशि खर्च हुई, इससे संबंधित बिल-वाउचर और अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग की गई है। आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि गैस हीटर अनुपयोगी, क्षतिग्रस्त या गायब हैं, तो इसके लिए कौन अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार हैं तथा क्या अब तक इस संबंध में कोई जांच कराई गई है या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठंड के मौसम में सार्वजनिक स्थलों पर राहत देने के लिए लगाए गए गैस हीटर यदि वास्तव में खरीदे गए थे, तो आज वे नजर क्यों नहीं आ रहे। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग, लापरवाही या संभावित गड़बड़ी की आशंका गहराती जा रही है। गौरतलब है कि जिले में अलाव जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने और ठंड से राहत देने के उद्देश्य से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गैस हीटर लगाए गए थे। इन हीटरों में एलपीजी का उपयोग किया जाना था, ताकि धुएं से होने वाले प्रदूषण में कमी लाई जा सके। यह पहल तत्कालीन जिलाधिकारी नेहा शर्मा द्वारा की गई थी,जिसमें अधिकारियों को इनके संचालन और निगरानी के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इस योजना के तहत गोंडा जिले की विभिन्न नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कुल 27 स्थानों पर गैस हीटर लगाए गए थे। प्रत्येक नगर पंचायत में दो गैस हीटर लगाए जाने की व्यवस्था थी, जबकि नगर पालिका परिषद कर्नलगंज और मनकापुर में चार-चार, तथा नगर पालिका परिषद गोंडा में पांच गैस हीटर लगाए गए थे। प्रत्येक गैस हीटर की कीमत लगभग 12,500 रुपये बताई गई थी और एक रिफिलिंग लगभग 25 दिन तक चलने वाली थी, जिससे इसे अलाव की तुलना में अधिक किफायती और दीर्घकालिक समाधान बताया गया था। अब आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी के बाद प्रशासन और नगर पालिकाओं की भूमिका पर निगाहें टिक गई हैं। यदि समयबद्ध और स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया,तो यह मामला केवल गैस हीटरों के गायब होने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।



