गोंडा : कुआंना रेंज में आम के बागानों की बर्बादी, जनप्रतिनिधि पर संरक्षण का आरोप, फॉरेस्ट कर्मियों की चुप्पी से उठे सवाल


गोंडा। एक ओर जहां प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर हर साल वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के कुआंना रेंज में फलदार वृक्षों की अवैध कटान पर प्रशासन की चुप्पी ने पूरे अभियान को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। शनिवार को रेंज क्षेत्र के जगतापुर गांव में एक बड़े आम के बगीचे की कटान की सूचना पर जब पड़ताल की गई तो पता चला कि केवल 15 पेड़ों का ही परमिट जारी हुआ है, जबकि मौके पर भारी संख्या में आम जैसे फलदार वृक्षों को बेरहमी से काटा गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि जब इस मामले की शिकायत फॉरेस्ट गार्ड से की गई तो उसने कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया और जवाब दिया कि “बगीचे को कटने दो, मुझे सब पता है, तुम लोग इसमें हाथ मत डालो, ये कोई मामूली आदमी नहीं है, जनप्रतिनिधि हैं, मुझे नौकरी नहीं गंवानी।” सूत्रों के मुताबिक यह जनप्रतिनिधि जिले से बाहर का है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पूरी कटान प्रक्रिया को संरक्षण मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ पेड़ों का परमिट दिखाकर सैकड़ों पेड़ों की कटाई की जा रही है और अधिकारियों की मिलीभगत से वन कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

सरकार एक ओर “एक पेड़ मां के नाम” जैसी भावनात्मक अपील के जरिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं जनप्रतिनिधियों के इशारे पर बड़े-बड़े बागानों का सफाया किया जा रहा है। इस मामले की शिकायत डीएम व मंडलायुक्त देवीपाटन से दूरभाष के माध्यम से की गई है। वहीं रेंजर कुआंना का कहना है कि 15 पेड़ों का परमिट था और बाकी कटान को रुकवा दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में बाकी कटान रुकवा दी गई या परमिट की आड़ में वन विभाग की आंखों के सामने पूरा बगीचा साफ कर दिया गया? अब देखना है कि प्रशासन इस पर क्या सख्त कदम उठाता है या मामला ऐसे ही दबा दिया जाएगा।