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गोंडा : पुलिस भर्ती में उम्र सीमा को लेकर उठा सवाल, देखिए आरक्षण के नाम पर सोशल मीडिया पर सत्येंद्र प्रताप सिंह ने क्या कहा


परसपुर (गोंडा) उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में 32679 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने के साथ ही एक बार फिर आरक्षण और उम्र सीमा को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। परसपुर विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ग़लिबहा मौजा मधईपुर खांडेराय निवासी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने फेसबुक लाइव के माध्यम से उम्र के नाम पर दिए जा रहे आरक्षण पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस भर्ती में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 18 से 22 वर्ष की आयु तक ही अवसर दिया जा रहा है, जबकि अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 18 से 27 वर्ष तक की छूट मिल रही है, जो सामान्य वर्ग के युवाओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सामान्य वर्ग के घरों में जन्मे युवाओं का क्या दोष है कि उन्हें कम उम्र सीमा में ही सीमित कर दिया गया है। सत्येंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि आरक्षण के नाम पर यदि शैक्षिक योग्यता या कटऑफ में अंतर किया जाए तो उसे समझा जा सकता है, लेकिन उम्र सीमा में इस तरह का भेदभाव सामान्य वर्ग के युवाओं में हीन भावना उत्पन्न करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पुलिस भर्ती परीक्षा में उम्र के नाम पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव हो रहा है, तब सभी नेता और जनप्रतिनिधि मौन हैं। उन्हें सदन में खड़ा होकर युवाओं के हित को ध्यान में रखते हुए लड़ाई लड़ना चाहिए जिससे कोई भी युवा आज के समय में बेरोजगार न रहे और न ही आने वाली पीढ़ी भी बेरोजगार रहे । उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि उम्र के नाम पर आरक्षण और भेदभाव की नीति समाप्त की जाए या तो सामान्य वर्ग के युवाओं को भी पिछड़ी और अनुसूचित जातियों की तरह पांच वर्ष की समान छूट दी जाए या फिर सभी वर्गों के लिए पुलिस भर्ती परीक्षा में आवेदन की समान उम्र सीमा निर्धारित की जाए, ताकि प्रत्येक वर्ग के युवा समान अवसर के साथ भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकें । उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि इसी तरह की नीतियां जारी रहीं तो आज की पीढ़ी बेरोजगार रह जाएगी और आने वाली पीढ़ी को भी बेरोजगारी की तरफ धकेल दिया जाएगा ।

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