गोंडा : अदम गोंडवी की 14वीं पुण्यतिथि पर अंग्रेजी अनुवादित काव्य संग्रह का विमोचन, परसपुर में जुटेंगे साहित्य प्रेमी


परसपुर (गोंडा)। हिंदी साहित्य के प्रख्यात जनकवि, लोकचेतना के स्वर और जनसंघर्षों की सशक्त अभिव्यक्ति रहे रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी की 14वीं पुण्यतिथि 18 दिसंबर 2025, गुरुवार को उनके पैतृक गांव आटा पूरे गजराज सिंह, परसपुर स्थित अदम गोंडवी भवन परिसर में श्रद्धा, विचार और कविता के साथ मनाई जाएगी। सुबह 11 बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में पत्रकारों के साथ-साथ साहित्यकार, कवि, बुद्धिजीवी और कविता प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। पुण्यतिथि के अवसर पर अदम गोंडवी की रचनाओं के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित काव्य संग्रह का विधिवत विमोचन किया जाएगा। यह पुस्तक राजमंगल प्रकाशन, अलीगढ़ द्वारा दिसंबर 2025 में प्रकाशित की जा रही है। पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रख्यात विद्वान, लेखक और अनुवादक डॉ. अमित सारवाल (PhD) ने किया है। “आई विल टेक यू टू द कॉलोनी ऑफ द चमार्स एंड अदर पोएम्स” शीर्षक से प्रकाशित इस संग्रह में अदम गोंडवी की 74 ग़ज़लें, नज़्में और कविताएं शामिल हैं, जो मूल रूप से हिंदी और उर्दू में रची गई थीं। आयोजकों के अनुसार, इस संग्रह में अदम गोंडवी की वही बेबाक और धारदार अभिव्यक्ति सामने आती है, जिसने गांव, भूख, बेरोज़गारी, अन्याय और सामाजिक असमानता की कठोर सच्चाइयों को शब्द दिए। उनकी कविता हाशिए पर खड़े दलितों, महिलाओं, मुसलमानों और शोषित वर्गों की पीड़ा और संघर्ष को स्वर देती है। सरल भाषा में कही गई उनकी बातों का असर आज भी उतना ही तीखा और प्रभावशाली है। अदम गोंडवी का जन्म 22 अक्टूबर 1947 को आटा-परसपुर जिला गोंडा में हुआ था। बीमारी के चलते उनका निधन 18 दिसंबर 2011 को राजधानी लखनऊ के पीजीआई में हुआ।


जनपक्षधर और क्रांतिकारी कविता के लिए उन्हें 1998 में दुष्यंत कुमार पुरस्कार और 2007 में माटी रतन सम्मान से सम्मानित किया गया था। ‘धरती की सतह पर’, ‘गरम रोटी की महक’ और ‘समय से मुठभेड़’ उनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं, जो हिंदी साहित्य में जनकविता की महत्वपूर्ण धरोहर माने जाते हैं। कार्यक्रम के आयोजक और अदम गोंडवी की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ा रहे कवि दिलीप कुमार सिंह उर्फ दिलीप गोंडवी ने बताया कि पुण्यतिथि के अवसर पर कविता-पाठ, विचार-विमर्श और सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित संवाद भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अदम गोंडवी केवल कवि नहीं थे, बल्कि आम आदमी की पीड़ा, आक्रोश और उम्मीदों की आवाज थे। उनकी पंक्तियां—“दिल के सूरज को सलीबों पे चढ़ाने वालो, रात ढल जाएगी इक रोज़ जमाने वालो”—आज भी सत्ता और व्यवस्था को आईना दिखाती हैं। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से इस साहित्यिक आयोजन में शामिल होकर जनकवि को श्रद्धांजलि देने की अपील की है।




