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गोंडा : सरकारी सीलिंग भूमि पर दबंगों का कब्जा, जांच चलती रही, दीवार बनती रही, अब छत डालने की हो रही तैयारी

परसपुर (गोंडा) : जनपद गोंडा के तहसील करनैलगंज अंतर्गत ग्राम अन्दुपुर में सरकारी सीलिंग भूमि पर अवैध कब्जा कर दबंगों द्वारा निर्माण किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गाटा संख्या 722 ख, रकबा 0.2020 हेक्टेयर, जो कि सीलिंग खाते की भूमि है। उस पर दीवार खड़ी कर अब छत डालने की तैयारी हो रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अर्धनिर्मित इमारत की तस्वीरें प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। जब तक जांच की फाइलें सरकती रहीं, दबंग निर्माण में जुटे रहे। उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 154 तथा सीलिंग एक्ट 1960 की धारा 27(1) उससे संबंधित सीलिंग कानूनों के अनुसार, सीलिंग खातों की भूमि न तो बेची जा सकती है, न स्थानांतरित की जा सकती है और न ही किसी सरकारी विभाग या निजी व्यक्ति द्वारा कब्जाई जा सकती है। ऐसे भूमि पर केवल राज्य सरकार ही पात्र व्यक्तियों को पट्टा दे सकती है। इस अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा सीलिंग भूमि पर कब्जा न केवल अवैध है, बल्कि दंडनीय अपराध भी है। यह कब्जा स्वतः शून्य माना जाता है।

ग्रामीण रामकुमार शुक्ल, बृजभूषण पाण्डेय, पूर्व डीएसपी आर एम दूबे, पिन्टू पाण्डेय, राम नरेंद्र पाण्डेय सहित दर्जनों लोगों के अनुसार उन्होंने 14 जून को जिलाधिकारी और आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव के राजेश गुप्ता उर्फ बोड़ी सहित लगभग आधा दर्जन लोगों द्वारा अवैध कब्जे और निर्माण की स्पष्ट जानकारी दी गई थी। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते शिकायत को आज तक लंबित रखा गया। इसी दौरान दबंगों ने तेज़ी से काम आगे बढ़ाया पहले दीवार खड़ी की और अब छत डालने की पूरी तैयारी कर ली है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस कृत्य में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मौन सहमति शामिल है।वहीं लेखपाल मानबहादुर वर्मा ने सीलिंग जमीन पर अवैध निर्माण की पुष्टि करते हुए रोकने की बात कही है और कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश की प्रतीक्षा है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ औपचारिक बयानबाज़ी में जुटा है, जबकि जमीन पर कब्जा दिन-दहाड़े किया जा रहा है। शनिवार को गांव में ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन और शासन से मांग करते हुए कहा है कि अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाए, दबंगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जाए, सीलिंग भूमि को कब्जा मुक्त कर पात्र जरूरतमंदों को उनका वैध हक दिया जाए तथा मनरेगा के कार्यो को गांव के मजदूरों से कराया जाय शिकायतों की जांच उच्चस्तरीय टीम से कराई जाए। यह मामला केवल अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि कानून की अवमानना, सामाजिक न्याय की अवहेलना और प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रतीक है। यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अन्य क्षेत्रों में भी अवैध कब्जों को बढ़ावा देगा।

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