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गोंडा : मौतशाला बन गई यह गोशाला,भूख प्यास से मर रहे मवेशी, कौवों का शिकार बने मृत पशु


परसपुर गोण्डा : नगर पंचायत परसपुर क्षेत्र के बालपुर रोड पर थाने के पास स्थित गौशाला की भयावह स्थिति ने सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।सरकार द्वारा बेसहारा और छुट्टा मवेशियों के संरक्षण और देखभाल के उद्देश्य से बनाए गए इस पशु आश्रय केंद्र में मवेशी भूख और प्यास से तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं।स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि गौशाला के भीतर मरे पड़े मवेशियों को कौवे नोचते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि यहां देखभाल के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।पशु आश्रय केंद्र की दशा देखकर यही प्रतीत होता है कि संचालन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी या तो कभी आते ही नहीं या फिर पूरी तरह संवेदनहीन हो चुके हैं।यहां चारा, पानी और इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे मवेशी दम तोड़ रहे हैं।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मृत मवेशियों के शव न तो हटाए जा रहे हैं और न ही उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है, जिससे वे खुले में पड़े-पड़े सड़ रहे हैं और कौवों का शिकार बन रहे हैं।मृत मवेशी की हालत देखकर यह स्पष्ट होता है कि उसकी मौत दो दिन पहले हो चुकी थी, इसके बावजूद अब तक कोई जिम्मेदार वहां नहीं पहुंचा।थाना, नगर पंचायत कार्यालय, ब्लॉक मुख्यालय और पशु चिकित्सालय जैसे प्रमुख सरकारी संस्थान गौशाला से कुछ ही दूरी पर हैं, फिर भी कोई अधिकारी या कर्मचारी इस गंभीर लापरवाही को लेकर सक्रिय नहीं दिख रहा है।राज्य सरकार छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए योजनाएं चला रही है, करोड़ों रुपये खर्च कर गौ आश्रय केंद्रों का निर्माण कराया गया है और उनकी देखभाल के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की गई है, लेकिन धरातल पर इन योजनाओं का लाभ पशुओं तक नहीं पहुंच पा रहा है।बालपुर मार्ग पर स्थित यह गौशाला प्रशासनिक उदासीनता और विभागीय लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन चुका है।यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो यह गौशाला बेसहारा मवेशियों के लिए आश्रय स्थल के बजाय एक खामोश कब्रगाह बन जाएगी।

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