
तुम्हारे आने से एक नया रंग
और जुड़ गया ,
ज़िंदगी में ख़ुशियों की कमी ना थी ,
लेकिन तुम्हारे आने से मुस्कुराहट में ,
एक लालिमा बदने लगी ,
मुश्किलें ज़िंदगी में यूँ ,
तो न कम थी ,
लेकिन तुम्हारे आने से ,
उनके हल आने लगे ।
खाना तो हर कोई सुबह ,
दोपहर खाता है ,
लेकिन तुम्हारे साथ खाने का ,
ज़ायक़ा आने लगा ।
बाज़ार तो यूँ ही निकल जाते है ,
कभी भी
लेकिन तुम्हारे साथ जाने की ,
रौनक़ ही कुछ और है ।
हम न उन्हें समझ पाए ,
लेकिन वो हमें समझते चले गए ।
खून का रिश्ता न होते हुए भी ,
हर रिश्ते निभाते रहे , यूँही चलते रहे ।
बेरंग सी ज़िंदगी तो नहीं थी ,
लेकिन तुम्हारे आने से ,
हर चीज़ जुड़ती चली गयी ।
ज़िंदगी हर वक्त ,
गुलाबी तो नहीं होती है ,
कभी पीली तो ,
कभी काली भी होती है ।
लेकिन तुम्हारे आने से ,
रंगो में निखार आता चला गया ,
एक रंग तुम्हारी दोस्ती का ,
मुझपे निखरता चला गया ।
मित्रता यू ही नहीं होती ,
हर किसी से ,कुछ तो पिछले
जन्म का ,पवित्र रिश्ता होता है ।
इसीलिये तो कहती हूँ ,
तुम्हारे आने से एक रंग और जुड़ गया ।
निधि शर्मा
पर्ल कोर्ट , रामप्रस्थ , वैशाली
ग़ाज़ियाबाद ।