गोंडा : गोंडा में खूनी खेल: 20 साल पुराने भूमि विवाद में युवक की नृशंस हत्या, भाई गंभीर


गोंडा ( करनैलगंज ) : कर्नलगंज कोतवाली क्षेत्र के नारायणपुर मांझा स्थित दुल्हिन पुरवा गांव में मंगलवार देर रात बीस वर्ष पुराने भूमि विवाद ने भयावह रूप ले लिया, जिसमें एक युवक की मौके पर ही निर्मम हत्या कर दी गई और उसका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान 30 वर्षीय शिवशंकर दुबे उर्फ लल्ला दुबे पुत्र देवी दयाल के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार लल्ला दुबे रात में अपने खेत में सिंचाई कर रहे थे, तभी छत्तर बली दुबे अपने चार बेटों सुनील, विनोद, धर्मेंद्र और रविंद्र दुबे के साथ वहां पहुंचा। दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और आरोप है कि इसके बाद पिता व पुत्रों ने मिलकर लल्ला दुबे पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।


लल्ला को बचाने पहुंचे उनके भाई अमरनाथ दुबे पर भी चाकू से हमला किया गया, जिसके चलते वे गंभीर रूप से घायल हैं और गोंडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। घटना ने गांव में दहशत और मातम का माहौल पैदा कर दिया है। मृतक अपने पीछे 12 वर्षीय सौरभ, 10 वर्षीय शिवांश और 8 वर्षीय लक्ष्मी को छोड़ गया है, जिनका भविष्य अब अंधकार में नजर आ रहा है। घटना ने पुलिस की निगरानी और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह विवाद बीस वर्षों से पुलिस की जानकारी में था, बावजूद इसके समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले हस्तक्षेप किया गया होता तो शायद यह दिल दहला देने वाली वारदात टल सकती थी। घटना की सूचना पर कर्नलगंज के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र प्रताप राय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। छत्तर बली दुबे और उसके चारों बेटों के खिलाफ हत्या व मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया और पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है। हालांकि ग्रामीणों के मन में यह सवाल बरकरार है कि जब विवाद वर्षों से चल रहा था तो पुलिस पहले क्यों नहीं सक्रिय हुई। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब जबकि खून बह चुका है, प्रशासनिक सक्रियता लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी महसूस हो रही है। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह सवाल अभी भी गूंज रहा है—क्या गोंडा में कानून का भय खत्म हो चुका है और क्या दोषियों को कड़ी सजा दिलाकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा पाएगा?


