GONDAउत्तरप्रदेशकरनैलगंज परसपुर
Trending

गोंडा : दबंग भूमाफिया पर जमीन हड़पने का आरोप, पीड़ित ने जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह की दी चेतावनी

परसपुर (गोंडा) : एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार जहां जीरो टॉलरेंस नीति की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़िले में दबंग भूमाफियाओं पर जमीन हड़पने के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। ताज़ा मामला परसपुर थाना क्षेत्र के ग्राम चरौंहा निवासी एक वृद्ध व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने से आहत होकर जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। पीड़ित राजपति सिंह पुत्र स्वर्गीय रामनरेश सिंह ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए लिखित प्रार्थना पत्र में बताया कि वह बचपन से ही ग्राम महेशपुर, परगना नवाबगंज, तहसील तरबगंज में रह रहा है। वहीं रहकर उसने कामता प्रसाद सुन्दरलाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या (फैजाबाद) से बीए व एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। राजपति सिंह के अनुसार ग्राम महेशपुर में निवास के दौरान वह कई खातों की भूमि पर विधिवत कब्जे में आकर कृषि कार्य करता रहा। बाद में गांव में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें दीर्घकालीन कब्जे के आधार पर सहायक चकबंदी अधिकारी के आदेश से बकाया लगान जमा कराते हुए उसका नाम संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज किया गया। चकबंदी के दौरान सीएच-23, सीएच-41 और सीएच-45 बनते हुए अंततः नई खाता संख्या-103 में गाटा संख्या-399 (रकबा लगभग 9.16 एकड़) उसके नाम दर्ज हुई। इसके बाद कई वर्षों तक खतौनियां भी उसके नाम से चलती रहीं। पीड़ित का आरोप है कि ग्राम महेशपुर के कुछ भूमाफियाओं ने साजिश के तहत एक कथित महिला संजू देवी उर्फ गायत्री देवी को उसकी पुत्री दर्शाते हुए गाटा संख्या-399 का प०क०-11 आदेश दिनांक 27 जुलाई 2006 को फर्जी तरीके से दर्ज करा लिया। जानकारी होने पर उसने उक्त आदेश को निरस्त कराने के लिए तहसील तरबगंज में प्रार्थना पत्र दिया, जो लंबे समय तक विचाराधीन रहा। इसी दौरान भूमाफियाओं द्वारा उसकी पत्रावली तहसील से गायब करा दी गई। आरोप है कि इसी प०क०-11ख आदेश के आधार पर संजू देवी उर्फ गायत्री देवी ने उक्त भूमि का बैनामा कई लोगों के पक्ष में कर दिया। तभी से पीड़ित विभिन्न प्रशासनिक और न्यायिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। राजपति सिंह ने बताया कि उसने फर्जी प०क०-11 आदेश के विरुद्ध थाना तरबगंज में मुकदमा अपराध संख्या-492/2024 दर्ज कराया था, लेकिन विवेचक द्वारा विपक्षियों के प्रभाव में आकर अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई, जिससे वह बेहद आहत है। उसका कहना है कि 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद फर्जी तरीके से दर्ज प०क०-11ख आदेश दिनांक 27.07.2006 को निरस्त नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, उसके जीवित रहते हुए भी उसे अभिलेखों में मृतक की श्रेणी में दिखाया गया, जो उसके साथ गंभीर अन्याय है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि मुकदमा अपराध संख्या-492/2024 की निष्पक्ष पुनः विवेचना नहीं कराई गई और उसे न्याय नहीं मिला, तो वह मजबूरी में जिलाधिकारी आवास के सामने आत्मघाती कदम उठाने को विवश होगा।
मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

Related Articles

Back to top button