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गोंडा : राजा रियासत राजमंदिर परसपुर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई श्री कृष्ण जन्माष्टमी

परसपुर, गोंडा: गोंडा जिले के परसपुर क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक राजा रियासत राजमंदिर राजा टोला,श्रीरामजानकी मन्दिर चौक बाजार,आशीशेश्वर नाथ महादेव मंदिर राजपुर,थाना, प्राचीन शिव मंदिर मुरावन टोला, हनुमान मंदिर आटा समेत तमाम मन्दिरों शिवालयों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष विशेष धार्मिक उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। विगत 16 जुलाई की रात मंदिर के गर्भगृह से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की अष्टधातु की मूर्तियाँ अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर ली गई थीं, जिससे समस्त क्षेत्र में गहरा आक्रोश फैल गया था। मंदिर के सर्वराकार कुंवर विजय बहादुर सिंह उर्फ बच्चा साहब द्वारा इसकी सूचना पुलिस को दी गई, जिसके आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना आरंभ की गई, किंतु घटना के एक माह पश्चात भी चोरी गई मूर्तियों का कोई सुराग नहीं लग सका।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे महत्वपूर्ण पर्व के निकट आते ही श्रद्धालुओं की चिंता मूर्तियों की अनुपस्थिति को लेकर बढ़ गई थी। इस चिंताजनक स्थिति में अवध धाम से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और लड्डू गोपाल की नई अष्टधातु मूर्तियाँ मंगाई गईं। जन्माष्टमी से एक दिन पूर्व शुक्रवार को राजमंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण और रीति-रिवाजों के अनुसार पवित्र पूजा-अर्चना, शुद्धिकरण के बीच मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा विधि-विधानपूर्वक कराई गई। इस अनुष्ठान का नेतृत्व पंडित नागेश्वर नाथ शुक्ला शास्त्री ने किया, जिनके साथ पंडित विनोद कुमार पांडेय एवं पंडित चंद्रशेखर चतुर्वेदी ने श्रीराम, लक्ष्मण और लड्डू गोपाल की मूर्तियों का पूजन-अर्चन और प्राण प्रतिष्ठा विधिपूर्वक संपन्न कराया।

मुख्य यजमान के रूप में मंदिर के सर्वराकार विजय बहादुर सिंह के पुत्र वैभव सिंह और उनकी धर्मपत्नी द्वारा अपने कर-कमलों से मूर्तियों की स्थापना कराई गई। इस आयोजन ने राजमंदिर में पुनः भक्ति की लौ प्रज्वलित कर दी और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को और भी दिव्य स्वरूप प्रदान किया। शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिर परिसर को भव्य सजावट से सजाया गया। रंग-बिरंगी रोशनी, पुष्पों और पारंपरिक सजावटी सामग्री से मंदिर को सजाकर लड्डू गोपाल को सुंदर झूले में विराजमान किया गया।

जैसे ही रात्रि के बारह बजे श्रीकृष्ण के जन्म का पावन समय आया, पूरा मंदिर परिसर “नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे भक्ति गीतों, घंटे-घड़ियाल और शंखध्वनि से भर उठा। श्रद्धालु भक्तों ने नृत्य, भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ भगवान के जन्म का स्वागत किया और आरती के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिरों और घरों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। जगह-जगह श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाई गईं।

रात के बारह बजते ही जैसे ही कन्हैया का जन्म हुआ, माहौल भक्तिमय जयघोषों और बधाई गीतों से सराबोर हो गया। महिलाओं ने पारंपरिक सोहर और बधाई गीत गाकर बालगोपाल के जन्म की खुशी मनाई। मंदिर के पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया कि द्वापर युग में भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को कंस के कारागार में माता देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। उनका जन्म संसार से अधर्म और अन्याय को समाप्त करने के लिए हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल से लेकर महाभारत काल तक धर्म की स्थापना, सत्य की रक्षा और मानव कल्याण के लिए अनेक लीलाएं रचीं। इसी कारण उनका जन्मोत्सव पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

आधी रात को जन्मे कन्हैया के स्वागत में परसपुर के राजा रियासत राजमंदिर में भजन-कीर्तन पर झूमते भक्तों ने उल्लास के साथ जन्म का स्वागत किया। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं ने प्रभु के जन्मोत्सव का आनंद लिया। इस प्रकार राजा रियासत राजमंदिर, राजा टोला परसपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह पावन पर्व भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

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