नीरज कुमार सिंह संवाददाता परसपुर गोंडा / Fri, Apr 10, 2026 / Post views : 275
“शिकायतें दबती रहीं, मौत ऊपर से गुजरती रही—कौन है जिम्मेदार?”

गोंडा : जनपद गोंडा अंतर्गत पोर्टरगंज पथवलिया में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया, जहां बिजली विभाग की कथित लापरवाही के चलते घर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन अचानक टूटकर गिर गई और उसकी चपेट में आने से वरिष्ठ पत्रकार रंजीत तिवारी की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और परिजनों में कोहराम मच गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह करीब 9 बजे तेज हवा के दौरान लाइन में स्पार्किंग हो रही थी, उसी दौरान तार टूटकर नीचे गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार रंजीत तिवारी अपने घर के बाहर मौजूद थे और बच्चों को खतरे से दूर हटने के लिए कह रहे थे, तभी अचानक तार उनके ऊपर गिर पड़ा और करंट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।


घटना के बाद सामने आई जांच रिपोर्टों ने पूरे मामले को और विवादित बना दिया है। एक ओर विभाग के अधिशासी अभियंता स्तर की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि रंजीत तिवारी अपने घर से निकलकर काम पर जा रहे थे, उसी दौरान तेज हवा के कारण लाइन के पास लगे पेड़ की डालियां तार से टकराईं, जिससे लाइन टूटकर उनके ऊपर गिर गई और यह हादसा हो गया। इस रिपोर्ट में इसे प्राकृतिक कारणों और परिस्थितिजन्य दुर्घटना बताया गया है। वहीं दूसरी ओर मुख्य अभियंता स्तर की जांच आख्या में अलग ही तथ्य सामने रखे गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार घटना के समय रंजीत तिवारी मौके पर खड़े होकर वीडियो बना रहे थे और उसी दौरान लाइन में आई खराबी के चलते तार टूटकर उनके ऊपर गिर गया। साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लाइन के पास पेड़ों की डालियां और तेज हवा इस दुर्घटना के प्रमुख कारण रहे, जबकि लाइन की ट्रिपिंग व्यवस्था को सही बताया गया है। एक ही विभाग के दो अधिकारियों की इन विरोधाभासी रिपोर्टों ने पूरे मामले की निष्पक्षता और सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि सच्चाई को छिपाने और जिम्मेदारी से बचने के लिए अलग-अलग तरीके से घटना को पेश किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि पिछले करीब 10 वर्षों से इस हाईटेंशन लाइन को हटाने या शिफ्ट करने की मांग की जा रही थी, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके चलते यह हादसा हुआ। घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और यह भी आरोप लगाया है कि लाइन शिफ्टिंग के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद कार्य नहीं कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उच्च स्तरीय जांच टीम गठित कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। इस घटना के संबंध में थाना कोतवाली नगर में एफआईआर संख्या 0322/2026 दर्ज की गई है, जिसमें बिजली विभाग के जेई, एसडीओ, एक्सईएन, एसई और चीफ इंजीनियर को नामजद करते हुए गैर इरादतन हत्या के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह पूरा मामला अब एक बड़े सवाल के रूप में सामने है कि आखिर सच्चाई क्या है और किसे बचाने के लिए अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं। जब एक ही विभाग के अधिकारी एक ही घटना पर अलग-अलग बयान दे रहे हैं, तो निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
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